ब्लॉगिंग नए सिरे से

by Dr. Satish Chandra Satyarthi  - July 18, 2012

ब्लॉगिंग करीब पांच साल पहले शुरू की थी. ऐसे ही शौकिया. वो शौकिया ही चला लगभग अब तक. कितने ब्लॉग कहाँ-कहाँ बना रखे हैं खुद भी याद नहीं. और सब ऐसे ही फालतू. अधिकांश में दो-चार उल्टी-सीधी चीजें डाल के छोड़ी हुई हैं. जिनपर कुछ ज्यादा पोस्ट भी हैं वो भी चलताऊ टाइप की. कम शब्दों में कहें तो इसको ब्लॉगिंग माध्यम का दुरुपयोग कह सकते हैं.  और इसका कारण सिर्फ एक ही था और है – ब्लॉगिंग के बारे में जानकारी का अभाव. जैसे बंदर (या छोटे बच्चे) के हाथ में कोई लैपटॉप पकड़ा दे तो वों जो कुछ कर सकता है वही मैंने सालों तक ब्लॉगिंग के साथ किया. और मेरे जैसे लाखों लोग कर रहे हैं. इससे अगर किसी का सबसे ज्यादा नुकसान है तो वह खुद का. इंटरनेट तो कूड़ाघर बनता जा ही रहा है. खैर उसपर फिर कभी…

तो ब्लॉगिंग के बारे में जानकारी का अभाव मतलब यह नहीं कि मुझे कुछ पता ही नहीं था या मुझे समझ नहीं आता था. एक्चुअली कम्प्यूटर और टेक्नोलॉजी के मामले में मैं अपने आप को औसत से ऊपर ही मानता हूँ. कम्प्यूटर सायंस पढ़ा भी काफी समय तक हूँ. ब्लॉगिंग की तकनीक के बारे में भी काफी पता था. लेकिन अब सोचता हूँ तो लगता है जितना भी पता था वह कुछ भी नहीं था. एक्चुअली ज्यादा समझने की कोशिश नहीं की कभी ब्लॉगिंग को. यह हमेशा एक टाइम पास और मनोरंजन की सी चीज ही लगता था. कभी ऐसे विषय पर ब्लॉग बना दिया जिसके बारे में मेरे पास लिखने को ज्यादा था नहीं. कभी लिखने को था तो कैसे लिखना चाहिए इसकी गलत समझ थी. कुल मिलाकर ब्लॉगिंग क्यों कर रहा था यह भी पता नहीं था. बस ऐसे ही टाइम पास चल रहा था. कभी जोश में आता तो एक दिन में दो पोस्ट लिख मारता और फिर जोश ठंडा हुआ तो महीनों तक ब्लॉग लिखना-पढ़ना सब बंद. जब मन हुआ नया ब्लॉग बना लिया. एक प्रोफेशनल और सशक्त माध्यम के रूप में ब्लॉगिंग की समझ नहीं थी.

मेरा एक ब्लॉग है टॉपिक गाइड डॉट कॉम. यह कोरियन लैंगुएज प्रोफिशिएंसी टेस्ट के बारे में जानकारी देने के लिए है. वैसे बनाया मैंने इस ब्लॉग को भी हलके में ही था लेकिन यह धीरे धीरे सीरियस होता चला गया. सच कहूँ तो इस ब्लॉग के कारण ही मैंने ब्लॉगिंग को सही तरीके से जाना, समझा, सीखा. तीन महीने पहले मैंने अपने इस ब्लॉग के तकनीकी पहलुओं में दिलचस्पी लेनी शुरू की. यह देखकर आश्चर्य हुआ कि जिस ब्लॉग को मैंने लगभग दो साल से यूँ ही बना कर छोड़ा हुआ है और जिसपर शायद ही महीनों में कुछ नया लिखता हूँ, उस ब्लॉग के पृष्ठ औसतन चार-पाँच सौ बार रोज देखे जा रहे हैं. फिर और कई सारे पहलुओं का कुछ समय तक विश्लेषण किया तो बड़ी नयी-नयी चीजें देखने को मिलीं. ब्लॉग और ब्लॉगिंग में दिलचस्पी बढ़ी. इससे पहले मुझे अपनी बात कहने में दिलचस्पी होती थे, ब्लॉग की तकनीक में नहीं. इस बार उलटा हुआ. लगा कि मैं तकनीक को सही तरीके से यूज नहीं कर रहा हूँ और यही कारण है कि ब्लॉगिंग से बार-बार मेरा मन भी उबता है और ब्लॉगिंग से कुछ सकारात्मक हासिल करने में भी असफल रहा हूँ. फिर मैंने ब्लॉगिंग के तकनीकी और प्रोफेशनल पहलुओं के बारे में पढ़ना शुरू किया. कई सारे प्रोफेशनल ब्लॉगर्स से ऑनलाइन संपर्क किया. कई सारी वेबसाइट्स, किताबों को छाना और अपने टॉपिक गाइड ब्लॉग पर दुनिया भर के एक्सपेरिमेंट्स किये. और उसके बाद अभी कुछ दिन पहले मैंने अपने सारे पुराने छोटे-बड़े ब्लॉगों को खोला और देखा कि मैंने ब्लॉगिंग के नाम पर कर क्या रखा है अब तक. और देखकर क्या लगा यह विस्तार से नहीं बताऊंगा बस नतीजा ये हुआ कि मैंने अपने लगभग सारे पुराने ब्लॉगों को बंद कर दिया. बंद मतलब डीलिट नहीं. ब्लॉग का सब कुछ अभी भी है. बस सेटिंग चेंज कर दी कि वों ब्लॉग अब किसी सर्च इंजन पर नहीं आयेंगे. फिर मैंने अपने नाम का यह वेबसाईट डोमेन लिया और यह ब्लॉग बनाया. सोचा कि पुराने ब्लॉगों से कुछ ठीक-ठाक पोस्ट्स निकाल कर यहाँ डाल देता हूँ. पर आश्चर्य की बात थी कि इतनी सालों की ब्लॉगिंग में ढंग की दस पोस्ट्स नहीं मिलीं जिनको नए ब्लॉग पर डालना का मन करता.  दो-चार लेख थे जो थोड़े से चलने लायक थे उनको कॉपी करके इस ब्लॉग पर डाल दिया.

तो अभी तीन महीने पहले ब्लॉगिंग को सही तरीके से समझने की जो शुरुआत की वह अभी जारी है और जारी रहेगी. यह ब्लॉग तो पर्सनल है जिसपर वह सब आएगा जो मन में चलता रहता है इसके अलावा जो भी ब्लॉगिंग के बारे में सीखा हूँ और सीख रहा हूँ वह सब भी यहाँ डालूँगा. टॉपिक गाइड और दो और नए ब्लॉग शुरू किये हैं जिनपर कई सारे टेक्नीकल और प्रोफेशनल एक्स्पेरिमेंट्स करने हैं. वो सब कुछ इस ब्लॉग पर लिखूंगा. किसी और के भी काम आये तो और अच्छा है लेकिन पहला मकसद तो यह है कि जो भी नयी चीजें सीख और कर रहा हूँ वह कम से कम एक जगह ठीक से संकलित रहें. आगे कभी जरुरत हो तो देख पाऊँ. अभी इशारे के तौर पर एक बात और बताना चाहूँगा कि ऑनलाइन ब्रांडिंग और मार्केटिंग (ठेठ हिन्दी में ऑनलाइन पैसा कमाने) के कई तारीकों पर भी प्रयोग कर रहा हूँ. अभी तक बस एक तरीका तराई किया है वो भी प्रयोग के तौर पर ही, और वह  अभी तक तो सफल लग रहा है.  इस बारे में विस्तार से आने वाली पोस्ट्स में लिखूंगा. अभी के लिए इतना ही.  इस ब्लॉग पर आने के लिए एक बार फिर से आपका धन्यवाद.. आपके सुझावों और आपकी दुआओं का इंतज़ार रहेगा.

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Dr. Satish Chandra Satyarthi

Dr. Satish Satyarthi is the Founder of CEO of LKI School of Korean Language. He is also the founder of many other renowned websites like TOPIK GUIDE and Annyeong India. He has been associated with many corporate companies, government organizations and universities as a Korean language and linguistics expert. You can connect with him on Facebook, Twitter or Google+

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